शिमला को मिलेंगे दो मंत्री-एक स्पीकर का पद

जिला के पांच विधायकों में रेस; सीएम ने हाईकमान को भेजे नाम, प्रियंका गांधी लगाएंगी अंतिम मोहर
स्टाफ रिपोर्टर—शिमला
आठ में से सात सीटें कांग्रेस की झोली में डालने वाले जिला शिमला से दो मंत्री और एक स्पीकर का पद मिलना तय माना जा रहा है। हालांकि पांच विधायक इसके लिए रेस में प्रमुख तौर पर शामिल है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों और स्पीकर व डिप्टी स्पीकर के नामों हाईकमान को भेज दिए है। सूत्र बताते है कि सीएम ने स्पीकर के लिए चार नाम और मंत्री पद के लिए 16 नाम तय करके हाईकमान को भेजे हैं। कुल मिलाकर 20 नाम भेजे गए हैं। इन्हीं में से आठ से नौ मंत्री, एक स्पीकर और एक डिप्टी स्पीकर लगाया जाना है। बेशक कागजों में कुछ नाम तय है, लेकिन इनके ऐलान में अभी कुछ वक्त और लगेगा। इनमें जिला शिमला से पांच विधायक मंत्री और स्पीकर की दौड़ में शुमार है। हालांकि बताया जाता है कि आखिरी फैसला कांग्रेस महासचिव एवं प्रदेश के चुनाव प्रचार को बतौर स्टार प्रचारक धार देने वाली प्रियंका गांधी पर छोड़ा गया है। दलाल 24 विकल्प की समीक्षा
हाईकमान को भेजे गए नाम में कई जिलों से दो से तीन नाम विकल्प के तौर पर भेजे गए हैं। इसमें मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता जरूर बताई है।
ये पांच विधायक हंै मंत्री की रेस में
शिमला जिला से पांच नाम हाईकमान को भेजे जाने की सूचना है। इनमें विक्रमादित्य सिंह, रोहित ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह, मोहन लाल ब्राक्टा और कुलदीप राठौर का नाम शामिल है। इन्हीं में से दो मंत्रियों की तैनाती दलाल 24 विकल्प की समीक्षा तय है। यह भी उम्मीद है कि शिमला जिला को दो मंत्री और एक स्पीकर मिले। कुलदीप राठौर का नाम स्पीकर की रेस में आगे माना जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष के लिए शिमला-कांगड़ा में जंग
कैबिनेट विस्तार भले ही सत्र से पहले नहीं होगा, लेकिन स्पीकर का चयन 23 दिसंबर को हर हाल में होना तय माना जा रहा है।
स्पीकर के लिए दो विधायकों पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर और कुलदीप दलाल 24 विकल्प की समीक्षा पठानिया का नाम आगे माना जा रहा है। यह भी संभव है कि धनीराम शांडिल, चंद्र कुमार, रवि ठाकुर में से किसी एक को स्पीकर बनाया जाए।

ट्विंकल क्रीम (Twinkle Cream)

ट्विंकल क्रीम (Twinkle Cream) एक दवा है जिसका उपयोग त्वचा की एक सामान्य स्थिति जिसे मेलास्मा कहा जाता है, के इलाज के लिए किया जाता है। यह खुजली, लाली और सूजन जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करता है और तेजी से त्वचा नवीनीकरण प्रक्रिया की सुविधा भी प्रदान करता है।

मेलास्मा जो त्वचा पर काले या फीके पड़ चुके पैच के साथ होता है, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है। इस त्वचा की स्थिति से संबंधित सभी लक्षणों के लिए ट्विंकल क्रीम (Twinkle Cream) एक संपूर्ण समाधान है।

यह दलाल 24 विकल्प की समीक्षा इन त्वचा के पैच को हल्का करने में मदद करता है जो गर्भावस्था, गर्भनिरोधक गोलियां, त्वचा पर चोट या हार्मोनल दवाओं के कारण हो सकते हैं। क्रीम त्वचा की मलिनकिरण प्रक्रिया को अवरुद्ध करके काम करती है।

मेलास्मा के अन्य संबंधित लक्षण जैसे लालिमा, चकत्ते, दर्द या खुजली भी इस औषधीय क्रीम के आवेदन से प्रभावी ढंग से नियंत्रित होते हैं। ट्विंकल क्रीम (Twinkle Cream) का उपयोग करने से आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि यह काले और फीके पड़ चुके पैच की समस्या को ठीक करके त्वचा की उपस्थिति को बदल देता है।

लेकिन इसे हमेशा त्वचा विशेषज्ञ की देखरेख में निर्धारित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसके उपयोग से जुड़े कुछ सामान्य दुष्प्रभावों में आवेदन की जगह पर जलन, खुजली या लालिमा शामिल है।

बिल्कुल निर्देशित के रूप में प्रयोग करें; अति प्रयोग न करें। चिकित्सीय प्रभाव में कई सप्ताह लग सकते हैं। त्वचा के छोटे से क्षेत्र में लगा कर परीक्षण प्रतिक्रिया टेस्ट करे और 24 घंटे में चेक करे; अगर जलन या फफोले होते हैं तो उपयोग न करें।

आंखों के संपर्क से बचें। खुले घावों या रिसने वाले स्थानों पर इसे न लगाएं। उपयोग करने से पहले, क्षेत्र को धीरे से धोएं और सुखाएं। प्रभावित क्षेत्र पर एक पतली फिल्म लगाएं और धीरे से रगड़ें।

सीधे धूप से बचें या पुन: रंजकता को रोकने के लिए सनब्लॉक या सुरक्षात्मक कपड़ों का उपयोग करें। सूजन, लालिमा, दाने, खुजली, संक्रमण के लक्षण, स्थिति के बिगड़ने या उपचार में कमी की रिपोर्ट करें।

कोलेजियम पर पुनर्विचार का समय, कोई भी स्वयं के मामले में नहीं हो सकता न्यायाधीश

संविधान द्वारा देश की न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा का अधिकार देने के बाद भी संविधान की मूल भावना का एक सत्य यह भी है कि प्रजातंत्र का अंतिम सत्य एवं शक्ति प्रजा ही है। देश की संसद इस प्रजा का सीधा प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च सभा है।

डा. अभय सिंह यादव: हमारे देश की न्यायपालिका विश्व के श्रेष्ठतम न्यायतंत्रों की श्रेणी में उपस्थिति दर्ज करवाती रही है। स्वतंत्रता के उपरांत इसने समय की चुनौतियों से गुजरते हुए अपनी प्रतिष्ठा एवं गरिमा को सुरक्षित रखा है। संविधान ने इसे प्रजातंत्र के प्रहरी की भूमिका में संविधान की रक्षा का दायित्व सौंपा है। सरकार के शेष दोनों अंगों कार्यपालिका एवं विधायिका के कार्य की समीक्षा का दायित्व भी न्यायपालिका के पास है। पूरी व्यवस्था को सुव्यवस्थित एवं सुचारु बनाने के लिए तीनों ही अंगों को परिसीमित करने वाली लक्ष्मण रेखा भी संविधान में निहित है, ताकि सरकार के सभी अंग अपनी-अपनी सीमा में रहते हुए सामंजस्य एवं संतुलन के साथ अपने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ते रहें।

घरेलू स्तर पर अपनी नींव सुदृढ़ करने के साथ ही ‘नया भारत’ नववर्ष में वैश्विक कूटनीति के शिखर पर होगा।

उच्च पदों पर न्यायिक नियुक्तियों की वर्तमान कोलेजियम प्रणाली पर हाल में छिड़ी बहस ने आम जनमानस का ध्यान न्यायपालिका पर केंद्रित किया है। इसलिए और भी अधिक, क्योंकि कोलेजियम को लेकर विभिन्न नेताओं की ओर से संसद के भीतर और बाहर लगातार वक्तव्य दिए जा रहे हैं। निःसंदेह यह एक गंभीर विषय है। मूल रूप से संविधान में न्यायिक नियुक्तियों की एक सुस्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध दलाल 24 विकल्प की समीक्षा थी, परंतु कुछ परिस्थितिजन्य घटनाओं ने एक ऐसी स्थिति पर पहुंचा दिया, जहां न्यायपालिका ने अपनी न्यायिक समीक्षा की शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायिक नियुक्तियों का अधिकार काफी हद तक अपने पास सीमित कर लिया, जिसे कोलेजियम प्रणाली के रूप में जाना जाता है। अब इस कोलेजियम प्रणाली की कुछ सीमाएं रेखांकित होने लगी हैं। यही कारण है कि इस विषय में प्रबुद्ध वर्ग में चिंतन एवं विवेचन का सिलसिला शुरू हुआ है।

मां भारती के लाल अटल जी विराट व्यक्तित्व के धनी थे

केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद इस प्रणाली का एक पारदर्शी एवं प्रभावी विकल्प संसद के समक्ष लाया गया और न्यायिक नियुक्ति की इस व्यवस्था को देश की सर्वोच्च विधायिका ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान संशोधन विधेयक के जरिये बनाए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के अमल में आने से पहले ही अपने न्यायिक समीक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए उसे निरस्त कर दिया। आम जनमानस के मानस पटल पर इस घटनाक्रम ने अनेक प्रश्न छोड़ दिए। सामान्यतः कोई भी व्यक्ति अपने स्वयं के मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। इसके लिए हमेशा तीसरे पक्ष से निर्णय की अपेक्षा की जाती है।

नशे की तस्करी रोकने के लिए दूसरे देशों की सहायता ले रहा भारत

लगभग पूरी न्यायिक व्यवस्था की एक स्थापित मान्यता है कि यदि किसी मामले से किसी न्यायाधीश का कोई संबंध रहा है तो ऐसे मामलों की सुनवाई से वे स्वयं को अलग कर लेते हैं, किंतु इस मामले में न्यायपालिका ने स्वयं से सीधा संबंध रखने वाले मामले का खुद ही निर्णय कर दिया। यहां यह बात भी स्वाभाविक रूप से आती है कि सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर देश में कोई न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध ही नहीं है तो इसका निर्णय उसे ही करना था। इसके बाद भी इस विषय पर लीक से हटकर विचार किया जा सकता था, जिसमें इसे मात्र न्यायिक निर्णय मानने की मनोस्थिति से बाहर निकलकर विचार हो सकता था।

संविधान द्वारा देश की न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा का अधिकार देने के बाद भी संविधान की मूल भावना का एक सत्य यह भी है कि प्रजातंत्र का अंतिम सत्य एवं शक्ति प्रजा ही है। देश की संसद इस प्रजा का सीधा प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च सभा है। यही कारण है कि स्वयं संविधान ने इसमें संशोधन का अधिकार केवल संसद को ही दिया है। जब संसद ने विशेष तौर से सर्वसम्मति से एक कानून बना दिया और वह भी जो सीधे तौर पर न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित था, तो यह न्यायिक समीक्षा का सामान्य मामला नहीं था, जिसे लागू करने से पहले ही निरस्त करने की जल्दबाजी से बचा जा सकता था।

यदि इसे लागू होने के उपरांत समय की कसौटी पर खरा उतरने का अवसर दिया जाता तो यह स्थापित न्यायिक व्यवस्था एवं गरिमा के हित में होता। इसके क्रियान्वयन उपरांत गुण-दोष के आधार पर यदि यह समीक्षा होती तो जनमानस में इसकी स्वीकार्यता कहीं अधिक होती। इस संबंध में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता की मुख्य आधार शक्ति जन आस्था होती है। यह आस्था न्यायपालिका के निष्पक्ष एवं पारदर्शी न्याय दर्शन का प्रतिबिंब होती है, जिसके अविरल प्रवाह को बनाए रखना स्वयं न्यायपालिका का मूल दायित्व है। जनमानस में तनिक भी संदेह न्यायिक गरिमा के लिए घातक हो सकता है।

अतः न्यायिक नियुक्तियों के विकल्प में न्यायपालिका से अधिक सावधानी बरतने की अपेक्षा है। बेहतर तो यही होगा कि न्यायिक नियुक्तियों के मामले में न्यायपालिका को स्व-संपूर्णता और मुग्धता के भाव से बाहर निकलना होगा। यह कटु सत्य है कि मानव प्रकृति के स्वाभाविक दोषों से कोई भी व्यक्ति या संस्था पूर्ण रूप से मुक्त नहीं रह सकती। ये दोष मानव स्वभाव के अभिन्न अंग हैं, जिनसे पूर्ण मुक्ति हिमालय की कंदराओं में तपने वाले साधु भी संभवतः प्राप्त नहीं कर सके। अत: किसी भी संस्था को इनसे दूर रखने के लिए व्यवस्थागत छलनी की आवश्यकता है, जिसके मूल में पारदर्शिता हो। अतः न्यायपालिका को पारदर्शिता के साथ आंतरिक समीक्षा के माध्यम से आत्मदर्शन का रास्ता तलाश करना होगा।

(लेखक भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी एवं हरियाणा विधानसभा के सदस्य हैं)

रूस और चीन देखते रह गए लेकिन भारत ने कर दिखाया, वैश्विक हुआ ‘भारतीय रुपया’

अमेरिकी डॉलर का अस्थि विसर्जन तय हो गया है. मोदी सरकार ने भारतीय रुपये को इंटरनेशल करेंसी बनाने की ऐसी पहल शुरू की है, जिसके बारे में जानकर आप गर्व करेंगे.

Indian rupee for global trade

India-Sri Lanka Rupee trade: रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक ओर तो रूस के मजबूत पक्ष को दुनिया के सामने लाया लेकिन दूसरी ओर कथित वैश्विक शक्ति अमेरिका के खोखलेपन को उजागर भी दलाल 24 विकल्प की समीक्षा कर दिया। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से ही अमेरिका के अच्छे दिन खत्म हो गए। वैश्विक स्तर पर अमेरिका के वर्चस्व में सेंध लग गई। कई देशों ने अमेरिकी डॉलर के मकड़जाल से स्वयं को आजाद करने हेतु कदम भी बढ़ा दिए। भारत भी उन्हीं में से एक रहा। युद्ध के शुरुआती दिनों में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि रूसी ‘रूबल’ और चीनी ‘युआन’, डॉलर का विकल्प बन सकते हैं लेकिन अभी ये दोनों देश सोच ही रहे थे कि भारत ने इस क्षेत्र में पहली सफलता भी हासिल कर ली है।

India-Sri Lanka Rupee trade – श्रीलंका ने किया भारत से आग्रह

दरअसल, दुनिया के तमाम देश जैसे ताजिकिस्तान, क्यूबा, लक्समबर्ग, सूडान, जिम्बाब्वे, जिबूती, मलावी, इथियोपिया, श्रीलंका, मॉरिशस, सऊदी अरब आदि भारत के साथ रुपये में व्यापार करने हेतु बातचीत कर रहे थे लेकिन इस कड़ी में श्रीलंका (India-Sri Lanka Rupee trade) ने सबसे पहले बाजी मार ली है। WION की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की कमी से जूझ रहे श्रीलंका ने अपने यहां स्पेशल रुपी ट्रेडिंग अकाउंट शुरू किया है। इस तरह के अकाउंट्स को वोस्त्रो अकाउंट (Vostro Accounts) भी कहा जाता है। इस अकाउंट को खोलने के बाद श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका (CBSL) ने भारत के रिजर्व बैंक (RBI) से आग्रह किया है कि वह श्रीलंका में इंडियन रुपये (Indian Rupee) को विदेशी करेंसी के रूप में मान्यता दे।

ध्यान देने योग्य है कि श्रीलंका में अभी तक सारी चीजें या तो श्रीलंकन दलाल 24 विकल्प की समीक्षा रुपी या डॉलर में हो रही थी लेकिन अब श्रीलंका ने स्वयं भारत से इंडियन रुपये को विदेशी करेंसी की मान्यता देने की मांग की है। इसका दूसरा मतलब ये है कि भारत और श्रीलंका के कारोबारी और आम नागरिक, अमेरिकी डॉलर (US Dollars) के बजाय आसानी से भारतीय रुपये (Indian Rupee) में व्यापार और खरीदारी कर सकेंगे। ज्ञात हो कि RBI अब तक 18 वोस्त्रो अकाउंट्स खोल चुका है। जिनमें भारत ने रुस में 12 खाते खोले हैं, श्रीलंका में 5 और मॉरीशस में 1 अकाउंट खोला है। उम्मीद जताई जा रही है कि जिन देशों ने भी रुपये में व्यापार करने की डिमांड की है, वहां RBI अपने वोस्त्रो अकाउंट्स खोल सकता है। यानी यह स्पष्ट है कि भारतीय रूपया, अब अमेरिकी डॉलर का विकल्प बनने की ओर तेजी से बढ़ चला है।

डॉलर का अस्थि विसर्जन तय है

आपको बताते चलें कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है और इस मुश्किल दौर में भारत ने एक जिम्मेदार पड़ोसी देश होने के नाते श्रीलंका की खूब सहायता की है। दूसरी ओर श्रीलंका, विदेशी मुद्रा की कमी का सामना कर रहा है और ऐसे में उसने फिर से भारत का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, RBI के द्वारा हरी झंडी मिलते ही श्रीलंका विदेशी करेंसी के विकल्प के तौर पर भारतीय करेंसी का इस्तेमाल भी कर सकेगा।

अभी तक भारतीय रुपये के ग्लोबल होने की केवल बातें ही सामने आ रही थी लेकिन अब इसकी शुरुआत भी हो गई है। इसके अलावा विश्व में भारत के बढ़ते वर्चस्व को भी नकारा नहीं जा सकता है। अभी के समय में तमाम वैश्विक देश भारत के हिसाब से अपनी रणनीति तय करते हुए दिख रहे हैं। दूसरी ओर चीन पर किसी को भरोसा है नहीं, अमेरिका को कोई पूछ नहीं रहा, सब उसके मकड़जाल से निकले के प्रयास में ही जुटे हुए हैं। ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब भारतीय रूपया वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर का अस्थि विसर्जन कर देगा।

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