कोरोना काल में बढ़ा विदेशी निवेश (Image: Pixabay)

जरुरी जानकारी | इफ्को जल्द पेश करेगी नैनो डीएपी, विदेशी मुद्रा, सब्सिडी में भारी बचत की संभावना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नैनो तरल यूरिया पेश करने के बाद सहकारी संस्था इफ्को का लक्ष्य जल्द ही 600 रुपये में आधा लीटर नैनो डीएपी उर्वरक को बाजार में उतारने का है। यह एक ऐसा कदम है जो भारत को विदेशी मुद्रा की बचत करने और सरकारी सब्सिडी को भी काफी कम करने में मदद करेगा।

जरुरी जानकारी | इफ्को जल्द पेश करेगी नैनो डीएपी, विदेशी मुद्रा, सब्सिडी में भारी बचत की संभावना

नयी दिल्ली, 23 दिसंबर नैनो तरल यूरिया पेश करने के बाद सहकारी संस्था इफ्को का लक्ष्य जल्द ही 600 रुपये में आधा लीटर नैनो डीएपी उर्वरक को बाजार में उतारने का है। यह एक ऐसा कदम है जो भारत को विदेशी मुद्रा की बचत करने और सरकारी सब्सिडी को भी काफी कम करने में मदद करेगा।

इफ्को के प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी ने डिजिटल मीडिया मंच 'रूरल वॉयस' द्वारा आयोजित एक कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इफ्को नैनो-पोटाश, नैनो-जिंक और नैनो-कॉपर उर्वरक भी लाने की योजना बना रही है।

जून 2021 में सहकारी लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें संस्था इफ्को ने पारंपरिक यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया को तरल रूप में पेश किया। इसने नैनो यूरिया का उत्पादन करने के लिए विनिर्माण संयंत्र भी स्थापित किए हैं।

अवस्थी ने कहा कि इफ्को ने अब तक नैनो यूरिया की पांच करोड़ बोतलों का उत्पादन किया है, जिनमें से 4.85 करोड़ बोतलें बेची जा चुकी हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि नैनो यूरिया की कीमत पारंपरिक यूरिया से कम है और यह अधिक लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें प्रभावी और सुविधाजनक भी है।

नैनो यूरिया पर कोई सरकारी सब्सिडी नहीं है और इसे 240 रुपये प्रति बोतल की दर से बेचा जा रहा है।

अवस्थी ने कहा कि कंपनी ने नैनो डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) भी विकसित किया है और इस उत्पाद को बाजार में पेश करने के लिए सरकार की मंजूरी के लिए पहले ही आवेदन कर चुकी है।

उन्होंने घोषणा की कि नैनो-डीएपी की आधा लीटर की बोतल 600 रुपये में बेची जाएगी। इसकी एक बोतल डीएपी के एक बैग के बराबर होगी, जिस डीएपी बैग की कीमत 1,350 रुपये है।

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सऊदी को नाराज करेगा पाकिस्तान: अब ईरान से ऑयल खरीदेगी शाहबाज शरीफ सरकार; अमेरिका लगा सकता है प्रतिबंध

पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ सरकार अब ईरान से तेल खरीदने जा रही है। रूस से क्रूड ऑयल खरीदने का दांव पूरी तरह नाकाम हो चुका है। बहरहाल, अगर पाकिस्तान सरकार ईरान से तेल लेती है लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें तो उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

पहली बात तो यह है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच कट्टर दुश्मनी है। अगर पाकिस्तान इस फैक्ट को नजरअंदाज करते हुए ईरान से ऑयल डील करता है तो सऊदी नाराज होगा और इसका खामियाजा पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा। दूसरी बात- ईरान के एटमी प्रोग्राम के चलते उस पर अमेरिका ने सख्त प्रतिबंध लगा रखे हैं। अगर पाकिस्तान फिर भी वहां से तेल लेता है तो उसे भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। खास बात यह है कि डोनाल्ड ट्रम्प के दौर में भी पाकिस्तान ने ऐसी ही कोशिश की थी, बाद में हाथ खींच लिए थे।

14 जून को बिलावल ने तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से मुलाकात की थी।

रूस से फजीहत कराई

  • इसी साल फरवरी से पाकिस्तान सरकार रूस से भारत की तर्ज पर सस्ता क्रूड ऑयल खरीदने की कोशिश कर रही थी। तब इमरान खान प्रधानमंत्री थे। अप्रैल में उनकी सरकार गिरी तो लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें शाहबाज शरीफ ने मामला आगे बढ़ाया।
  • मजे की बात यह है कि दोनों लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें ही सरकारें मुल्क को गुमराह करती रहीं। वजह यह है कि अव्वल तो रूस किसी भी सूरत में पाकिस्तान को डिस्काउंट पर क्रूड बेचने तैयार नहीं लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें था। मान लीजिए अगर हो भी जाता तो खुद बिलावल भुट्टो ने पिछले हफ्ते माना कि उनके देश में भारत की तरह हाईटेक रिफाइनरीज नहीं हैं, जो क्रूड को पेट्रोल-डीजल और केरोसिन में बदल सकें।
  • इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि पेट्रोलियम मिनिस्टर मुसद्दिक मलिक पिछले महीने रूस गए और मुल्क वापस आकर ऐलान कर दिया कि रूस से भारत की तरह सस्ता क्रूड ऑयल मिलने जा रहा है। जाहिर है पेट्रोलियम मिनिस्टर सफेद झूठ बोल रहे थे।

ईरान बॉर्डर से पाकिस्तान में ऑयल स्मगलिंग की जाती है। इससे सरकार को घाटा होता है।

अब ईरान पर दांव
‘अल अरबिया’ न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, ईरान और पाकिस्तान की बॉर्डर मिलती हैं। पाकिस्तान को लगता है कि अगर ईरान से तेल खरीदा जाता है तो ट्रांसपोर्टेशन का खर्च काफी कम हो जाएगा। दूसरी बात यह है कि ईरान भी पाकिस्तान को तेल बेचने तैयार है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान सरकार ने तो पाकिस्तान को गेहूं, मांस और चावल भी बेचने का प्रस्ताव रख दिया है।

ईरान की मजबूरी यह है कि दुनिया के ज्यादातर देश उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम से नाराज हैं और अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से उसके साथ ट्रेड नहीं कर रहे। अब पाकिस्तान को लगता है कि वो लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें ईरान की इसी मजबूरी का फायदा उठा सकता है।

India Forex Reserve : विदेशी दौलत के मामले में भारत ने रूस को पीछे छोड़ा

भारत विदेशी मुद्रा भंडार रखने के मामले में दुनिया में चौथे पायदान पर पहुंच गया है। भारत ने इस रूस जैसे देश को पीछे छोड़ दिया है। दोनों में 4 बिलियन डॉलर का डिफ्रेंस आ गया है। अब भारत से आगे स्‍विट्जरलैंड, जापान और चीन हैं। इन तीनों देशों के पास विदेशी दौलत 1000 अरब डॉलर से ज्‍यादा हैं।

India Forex Reserve : विदेशी दौलत के मामले में भारत ने रूस को पीछे छोड़ा

कोरोना काल में बढ़ा विदेशी निवेश (Image: Pixabay)

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 608 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। 11 जून को समाप्‍त में हुए सप्‍ताह में 3.074 अरब डॉलर इजाफा हुआ है। जिसके बाद लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 608.081 अरब डॉलर के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जिसके साथ ही भारत का विदेशी मुद्रा रूस से ज्‍यादा हो गया है। अब भारत से आगे स्‍विट्जरलैंड , जापान और चीन है। इन तीन देशों के पास एक हजार अरब डॉलर से ज्‍यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है।

आपको बता दें क‍ि इससे पहले चार जून , 2021 को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6.842 अरब डॉलर का इजाफा देखने को मिला था। जिसके बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 605.008 अरब डॉलर हो गया था। भारतीय रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 11 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का कारण विदेशी मुद्रा आस्तियों में हुई अच्छी वृद्धि है। यह कुल मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार , विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां आलोच्य सप्ताह के दौरान 2.567 अरब डॉलर बढ़कर 563.457 अरब डालर हो गईं। वहीं बात स्‍वर्ण भंडार की बात करें तो 49.6 करोड़ डॉलर का इजाफा देखने को मिला है। जिसके बाद यह भंडार भी 38.101 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले इसमें गिरावट देखने को मिली थी। आईएमएफ में एसडीआर 10 लाख डॉलर घटकर 1.512 अरब डॉलर रह गया। वहीं , आईएमएफ के पास देश का आरक्षित भंडार भी 1.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 5.011 अरब डॉलर हो गया।

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रूस को पछाड़ा : इन आंकड़ों लाइव विदेशी मुद्रा खरीदें के आने के बाद भारत ने रूस को पछाड़ दिया है। रूस अब चौथे स्‍थान से खि‍सककर पांचवें पायदान पर आ गया है। अब रूस के पास 604.800 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। वहीं भारत से आगे तीन और देश हैं। दुनिया में सबसे ज्‍यादा विदेशी मुद्रा भंडार 3,362.471 अरब डॉलर के साथ चीन के पास हैं। उसके बाद नंबर जापान का है। जिसके पास 1,378.467 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। जबकि स्‍विट्जरलैंड के पास 1,070.369 अरब डॉलर का विदेशी भंडार है।

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